मोनू कनौजिया - आइये जानते हैं…महाशिवरात्र‍ि पर उपवास का धार्मिक महत्व

हिंदुओं का पावन त्योहार 'महाशिवरात्र‍ि', जिसे भगवान शिव अथार्त महादेव जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इस पर्व में शिव में श्रद्धा रखने वाले व्यक्ति उपवास रखते हैं और विशेष मंत्रोचारण से भगवान शिव की आराधना करते हैं.

देखा जाए तो प्रत्येक महीने में एक शिवरात्र‍ि होती है, लेकिन फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्र‍ि का बेहद महत्व है, इसलिए इस शिवरात्रि को महाशिवरात्र‍ि कहा जाता है. महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु भगवान शिव का विधि अनुसार पूजन व अर्चन करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं.

यूँ तो भगवान शिव इतने भोले हैं कि वह मात्र एक पुष्प अर्पित करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं, शायद यही वजह है कि उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है. शिवरात्रि के दिन मंदिरों में भारी संख्या में भक्तों की भीड़ देखी जाती है, जो भगवान शिव की पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर आते हैं.

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।

अथार्त - जो कर्पुर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं. वह भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे हृदय में सदैव निवास करें, उन्हें मेरा नमस्कार है ||

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