मोनू कनौजिया - अन्नदाता की खुशहाली का सूचक पर्व बैसाखी आप सभी के जीवन में मंगल लाये

    सिख धर्म की स्थापना और फसलों के पकने पर मनाया जाने वाला उत्सव बैसाखी आप सभी के जीवन में भी मंगल लेकर आए. सम्पूर्ण भारत वर्ष में बिहू, विशु, नव वर्षा इत्यादि विभिन्न नामों से मनाया जाने वाला बैसाखी पर्व वैसे तो देश भर में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है, किन्तु पंजाब और हरियाणा में इसकी विशेष धूम रहती है. यहां लोग भव्यता से बैसाखी का पर्व मेलों, लंगर का आयोजन कर, गुरुग्रंथ पाठ का आयोजन कर, कीर्तन आदि करके मनाते हैं. इस दिन गुरद्वारों की रौनक देखते ही बनती है.

    मान्यता है कि वर्ष 1699 मे इसी दिन सिक्खो के अंतिम गुरु, गुरु गोबिन्द सिह जी ने सिक्खों को खालसा के रूप मे संगठित किया था,  इसी कारण भी यह दिन खास होता है. बहुत से स्थानों में बैसाखी की तैयारियां भी दीपावली की ही तरह कई दिनो पहले से शुरू हो जाती है, इसीलिए हमारा देश पर्वों से सजा एक मनोरम देश माना जाता है. लहलहाती फसलों को देखकर एक किसान को जो आत्मिक संतुष्टि मिलती है, उसका वर्णन शब्दों में करना शायद कठिन हो जाता, इसीलिए हमारी संस्कृति में बैसाखी जैसे समरसता भरे त्योहारों का मनाने का चलन है.

    मैं हृदय से आशा करता हूं कि सभी भारतीय किसानों की फसलें लहलहाती रहे, उनकी किसानी सशक्त एवं समृद्ध हो और आप सभी के जीवन में बैसाखी का यह पर्व मंगल ही मंगल भर दे. इन्हीं पवित्र मंगलकामनाओं के साथ आप सभी देशवासियों को बैसाखी पर्व की बहुत बहुत बधाइयाँ. 
    शुभकामनाओं के साथ 

    आपका पार्षद 

    मोनू कनौजिया 

    सआदतगंज वार्ड, लखनऊ 

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